अहले हदीस दो शब्दों के मिश्रण से बना शब्द है, अहल और हदीस׀ हदीस का शाब्दिक अर्थ है बात, लेकिन जम्हूर मुहद्दिसीन की इस्तिलाह में नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कौल व फ़ैल (कथन व कर्म) और उस अम्र (आदेश) को जो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने हुआ और आपने उसे मना न किया बल्कि उस पर खामोशी अख्तियार कर उसे जाइज़ रखा हदीस कहा जाता है׀
कुरआन मजीद में भी नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पाक बातों को हदीस कहा गया है׀ चनांचे अल्लाह तआला का इर्शाद है- और जब नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी बाज़ बीवियों से एक पोशीदा बात कही(तर्जुमा सूरह अल तहरीम 3)
हज़रत ज़ैद बिन साबित अन्सारी रजिअल्लाहु अन्हु से रवायत है कि रूसल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फ़रमाया- अल्लाह तआला उस शख्स को (हमेशा) तरोताज़ा रखे जिसने मेरी हदीस को सुनकर याद रखा (और) यहां तक कि उसे आगे (दूसरों) तक पहुंचाया׀ (हदीस अबू दाउद, तिर्मिजी, इब्न माज़ा)
कुरआन मजीद भी हदीस है
हज़रत जाबिर रजिअल्लाहु अन्हु से रवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जुमा के खुत्बा में जबकि हज़ारों का मजमा होता था पुरज़ोर और बुलन्द आवाज़ में इर्शाद फ़रमाया करते थे- ‘’फ-इन्-न ख़ैरल हदीसि किताबुल्लाहि’’ (हदीस मुसलिम व मिश्कात) यानी बिला शुब्ह बहतरीन हदीस अल्लाह तआला की किताब (कुरआन मजीद) है׀
खुद कुरआन मजीद में अल्लाह तआला का इर्शाद है- अल्लाहु नज़-ज़ला अहसनल हदीसि (सूरह जु-म-र 23) यानी अल्लाह तआला ने बहतरीन हदीस नाजिल फरमाई है׀
और अल्लाह तआला ने फरमाया- ‘’वमन अस्द-कु मिनल्लाहि हदीसा’’ (सूरह निसा 87) यानी और अल्लाह ताआला की बात से बढ़ कर सच्ची बात किसकी हो सकती है׀
नेज़ फ़रमाया- ‘’फ़-ल-अल्ल–क़ बाखिउन नफ़-स-क अला आसारिहिम इंलम यूमिनू बिहाज़ल हदीसि अ-स-फ़’’ (सूरह कहफ़ 6) यानी ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, शायद आप इन लोगों के पीछे ग़म के मारे अपनी जान खो देने वाले हैं׀ अगर यह इस हदीस पर ईमान न लाये׀
निष्कर्ष -
उपर्युक्त आयाते करीमा और हदीसे नबवी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से यह बात रोज़े रोशन की तरह स्पष्ट हो जाती है कि कुरआन मजीद अल्लाह तआला की हदीस है और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का क़ौल व फ़ैल और तक़रीर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीस है׀ इस प्रकार शब्द अहल का अर्थ बहुत खुला और स्पष्ट है यानी वाला׀
इस प्रकार साबित हुआ कि अहले हदीस का अर्थ है अल्लाह तआला की हदीस (कुरआन मजीद)और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीस (क़ौल व फ़ैल और तक़रीर) को मानने वाला इन दोनों हदीसों पर कामिल (पूर्णतः) तौर पर बगैर किसी उम्मती की इजाज़त और तक़लीद के एतिक़ाद (विश्वास) रखने वाला और अमल करने वाला׀
लक़ब अहले हदीस का कुरआन मजीद से सबूत-
इसमें कोई शक नहीं कि अल्लाह तआला ने हमारा नाम कुरआन मजीद में मुसलिम रखा है जैसा कि अल्लाह ताआला का इर्शाद है- ‘’हु-व सम्माकुमुल मुसलिमी-न मिन क़ब्ल’’ (सूरह हज्ज 78) यानी अल्लाह तआला ने पहले ही से तुम्हारा नाम मुसलिम रखा है׀
जिस तरह हमें कुरआन मजीद ने मुसलिम कहा है उसी तरह अहले किताब को भी मुसलिम के खिताब से नवाज़ा गया है׀ चुनांचे अल्लाह तआला का इर्शाद है- ‘’और जब हमने (हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के) हवारियों की तरफ़ वहीय भेजी कि मुझ पर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ, तब उन्होंने कहा हम ईमान लाए (ऐ ईसा अलैहिस्सलाम) तू गवाह रह साथ इसके कि हम मुसलमान हैं׀ (तरजुमा सूरह माइदा 111)
लेकिन इन मुसलमानों को फिर कुरआन मजीद इन शब्दों में हिदायत फ़रमाता है- ‘’वल यहकुम अहलुल इन्जीलि बिमा अन्ज़लल्लाहु फ़ीहि’’ (सूरह माइदा 47) यानी अहले इन्जील को अल्लाह तआला की नाजि़ल की हुई वहीय के मुताबिक़ ही फ़ैसला करना चाहिये׀
इससे यह बात रोज़े रोशन की तरह एकदम स्पष्ट हो गई है कि मुसलमान अपनी किताब की तरफ़ मन्सूब हो सकते हैं, जैसे ईसाइयों को मुसलमान होने के बावजूद अल्लाह तआला ने इन्हें अहले इन्जील के लक़ब से नवाजा है और इसी लक़ब से इन्हें खिताब किया गया है׀ इनकी किताब का नाम इन्जील था׀ हमारी किताब का नाम खुद किताब में ही हदीस रखा गया है और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का क़ौल व फ़ैल और तक़रीर भी हदीस है, जैसा कि पहले गुज़र चुका है׀
शब्द अहले हदीस कुरआन मजीद और तरीक़ा-ए-नबवी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दोनों को शामिल है׀ गोया कि अहले हदीस कहलाना मुसलिम होने के खि़लाफ़ नहीं है׀ हम मुसलिम भी है और अहले हदीस भी׀ जैसे ईसाई मुसलिम भी है और अहले इन्जील भी׀
...और मुसलिम का अर्थ है फ़रमांबरदार और अहले हदीस का अर्थ भी यही है यानी कुरआन मजीद और तरीक़ा-ए-नबवी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ताबेदारी करने वाला׀
इस प्रकार अहले हदीस कहलवाने में किसी किस्म की क़बाहत नहीं है बल्कि सबूत कुरआन मजीद से बिल्कुल स्पष्ट हो गया है׀
माखूज-‘’हम अहले हदीस क्यों हैं’’ मुअल्लिफ- मौलाना अब्दुल गफूर असरी, ‘अल किताब इन्टर नेशनल, जामिआ नगर, नई दिल्ली.
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