शनिवार, 9 जून 2012

र-फउल यदेन न करने वालों से चन्‍द सवालात


  

1-               र-फउल यदेन करने की जितनी हदीसें हैं सब सहीह और न करने की जो चन्‍द रवायात हैं वह सब ज़ईफ़, सब पर मुहददिसीन का कलाम है. अब कोई झूट बोलने के लिए यह कह देते हैं कि वह बगल के नीचे बुत रखते थे इसलिए र-फउल यदेन शुरू हुई. अरे भाई! नमाज़ जमात से फ़र्ज हो रही है मदीना में और बुतों वाली पार्टी मक्‍का में रह गई है. जहां जमात से नमाज़ फ़र्ज हुई वहां बुतो वाली पार्टी कोई नहीं है. जहां बुतों वाली पार्टी है वहां जमात से नमाज़ फ़र्ज नहीं है.
2-               अगर मान भी लिया जाय कि वह बगलों में बुत रखते थे जब पहली दफ़ा र-फउल यदेन करते हो. हम तो (अहले हदीस) कैसे करते है जो कि सुन्‍नत है और सही बुखारी की हदीस है कि आप कन्‍धों के बराबर हाथ उठाते और जो भाई (मुकल्लिदीन) र-फउल यदेन के इंकारी हैं वह कहां तक हाथ उठाते हैं(कानों की लो तक) ठीक है. तो जब यह पहली दफ़ा हाथ उठाए तो वह बुत साफ़ नीचे गिरे या नहीं? वह कोई एल्‍फ़ी (चिपकाने वाली चीज़) तो लगाकर तो नमाज़ को तो आते नहीं थे कि वह बुत चिपक जाते हों और नीचे न गिरते हों. तो जब पहली दफ़ा र-फउल यदेन करते हो वह क्‍यों करते हो बुत तो खतम हो गये !
3-               वह बड़े बेवकूफ़ थे जो बगलों में बुत लाते थे. जेब में डाल कर क्‍यों नहीं लाते थे? उन्‍हें इतनी अक़ल नहीं थी कि जेब में डाल लायें?
4-               बुत लाते कौन थे?उज़ो बिल्‍लाह यह तो नहीं कहा जा सकता कि सहाबा किराम बुत लाते थे, नहीं कहा जा सकता न. ठीक है मुनाफि़क़ लाते थे, अरे भाई मुनाफि़क़ होता वही है जो जाहिरी आपका, बातिनी आपका दुश्‍मन जो अन्‍दर से आपका दुश्‍मन हो वह क्‍या चाहेगा कि मेरी हकीक़त खुल जाए? और जब मुनाफि़कीन के बुत गिरते थे तो हज़रत उमर रजिअल्‍लाहु अन्‍हु की तलवार कहां थी? वह तो चाहते यही थे किसी को पता न लगे. अल्‍लाह तआला वहीय करके बताता था कि यह मुनाफि़क़ हैं. इसलिए यह मौलवियों की बनाई हुई ढकोसले वाली बात है.

5-               र-फउल यदेन न करने की किस रवायत को आप पेश करते हैं, किस रवायत को आप मन्‍सूख तस्‍लीम करते हैं, वह रवायत पेश करें.

6-               किस सन हिजरी में र-फउल यदेन मन्‍सूख हुई वह सन भी बयान फ़रमादें.

7-               किस नमाज़ में र-फउल यदेन मन्‍सूख हुई, वह नमाज़ भी बतादें कि वह नमाज़ फ़ज्र की थी, जुहर की थी कि अस्र की थी, मग़रिब की थी या ईशा की थी?
8-               र-फउल यदेन मक्‍का में मन्‍सूख हुई है या मदीना में मन्‍सूख हुई है? फिर अल्‍लाह तआला ने इसे कहा है कि मन्‍सूख हुई है या रसूलुल्‍लाह (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) ने कहा है कि र-फउल यदेन मन्‍सूख है?
9-               ईदैन की जो तकबीरात की र-फउल यदेन है और इसकी दलील भी इन्‍होंने (र-फउल यदेन न करने वालो) पेश करनी है, मगर इन्‍होंने जो दावा करते हैं उस दावे के मुताबिक़ वित्र वाली र-फउल यदेन भी मन्‍सूख है और तकबीरात ईदेन जो र-फउल यदेन है वह भी मन्‍सूख है और फिर यह मुक़ल्लिद हैं हनफ़ी मुकल्लिद जैसा कि यह दावा करते हैं तो उनको चाहिये था कि अपना दावा-ए-नसख़ को इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्‍लाह अलैहि) से साबित करें कि इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्‍लाह अलैहि) ने कहा  हे कि र-फउल यदेन मन्‍सूख है या उनके शागिर्दों से मन्‍सूख साबित करें?
जो ज़ईफ़ है वह क़वी को नसख़ कर सकता है? नहीं.

कुरआन किसके साथ है? हदीस किसके साथ है? सलफ़ किसके साथ हैं? र-फउल यदेन मन्‍सूख होती तो इमाम अहमद बिन हंबल (रहिमल्‍लाहु अलैहि) मन्‍सूख कहते, इमाम मालिक (रहिमल्‍लाहु अलैहि) मन्‍सूख कहते. मन्‍सूख होती तो इमाम बुखारी (रहिमल्‍लाहु अलैहि) मन्‍सूख कहते, अबू दाउद (रहिमल्‍लाहु अलैहि) मन्‍सूख कहते, इमाम निसाई (रहिमल्‍लाहु अलैहि) मन्‍सूख कहते. पता चला कि र-फउल यदेन मन्‍सूख नहीं है.

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