रविवार, 18 सितंबर 2011

वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता

जो इंसा को जीने का अंदाज सिखाता है
सांसों की आमद का गहरा राज बताता है
जो यह कहता है दुनिया कैसे ईजाद हुई
इस गलती से खारिज आदम की फरियाद हुई
जो यह कहता है दुनिया को सदा एक समझो
अपने एक होने में अल्‍लाह की सिर्फ रजा समझो
जो यह कहता है कि जो कुछ भी है फानी है
कहते हैं हम जिसे कयामत वह तो आनी है
कैसे होती सुबह कैसे शाम बताता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता है
जहां बुराई खतम , शुरू इस्‍लाम वहां से होता है
अपने बन्‍दों को इसका पैगाम वहां से है
एक मुकम्‍मल जिसने यह कानून बनाया है
उसने अपने बन्‍दों को हर गाम सिखाया है
कैसे जीना है तुमको और कैसे मरना है
इस दुनिया में रह कर क्‍या करना न करना है
हर अच्‍छी बातों का हुक्‍म हमें जो देता है
और आखिरत बन जाय यह दीन ही ऐसा है
जो इंसां को एक कामिल इंसा बनाता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता है
आज जहां में देखो तो हर ओर बुराई है
और बदी से नेकी की घनघोर लडाई है
इंसां ने दौलत को अपना धरम् बनाया है
और गुनाहों को ही अपना करम बनाया है
किसको है परवाह फराइज और उसूलों  की
दुनिया याद रही, भूले हर बात वह नबियों की
इक रस्‍ता है जो जन्‍नत की राह दिखाता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता है
दुनिया में आये हो तो इंसान बनो पहले
जिसकी उम्‍मत में हो, उसकी राह चलो पहले
उसकी फर्माबरदारी का नाम मुहब्‍बत है
यही अकीदा कहलाये और यही इबादत है
वेद हो या तौरेत  हो, इंजील हो या कुरआन
लेकिन दीने फितरत, दीने कयिम , एक है हां
वह कि जो ईमां नहीं लाये पछतायेंगे
जब दोजख की तकलीफों को सह न पायेंगे
जो सच्‍चा ईमान और यकीन और इल्‍म बढाता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता है
जो हजरत नूह पर उतरा इस्‍लाम वही तो है
आप (सल्‍ल0) तक पहुंचा इस्‍लाम वही तो है
जिक्र जिसका वेदों में इस्‍लाम वही तो है
और कुरआन की सूरों में इस्‍लाम वही तो है
जो समझाया नबियों ने इस्‍लाम वही तो है
दी इस्‍लाह हदीसों ने इस्‍लाम वही तो है
जो ईमान मुजमल है  इस्‍लाम वही तो है
और ईमान् मुफस्सिल  है इस्‍लाम वही तो है
जो कलिमा ए तैयब पहले पहल पढाता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता है
मैंने सोचा बुत को पूजू रूह नहीं मानी
इसको पूजो उसको पूजूं, क्‍या है मनमानी
दौलता पूजा, कुर्सी पूजा और लहू पूजा
पत्‍थर पूजा, घर  की पूजा और पशु पूजा
जो कुछ है बस एक वही बस एक वही नादां
इंसां को भगवान समझना है उसका अपमां
इससे बहतर है कि तुम खुद को पहचानो
बदी, गुनाहों से बच जाओ, बात मेरी मानो
जिसके जरिये इंसान दुआयें पाता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता है
इस मजहब में दुनिया का हर राज नुमायां है
जीने से मरने तक का हर तौर सिखाया है
है पाबन्‍दी कलमो, रोजों और नमाजों की
हज लाजिम है और लिखी फहरिस्‍त जकातों की
इंसान के हर एक अमल की खास दुआयें हैं
इक इक सूरह में अल्‍लाह की लाख शुआयें हैं
जैसे मां बच्‍चे को अच्‍छी बात सखाती है
अकल हुई तौहीद समझ ईमान सुनाती है
और हिदायत  जिसको दे मालिक वह पाता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता है
इसमें है तहजीब  सदाकत और वफादारी
घूंघट, आंचल, नेकी, लज्‍जा और पर्दादारी
इज्‍जत, गैरत और एक सलीका और भलाई है
मजबूती, बहबूदी, जाहिर सिर्फ खुदाई है
यह तो बस आमाल अदब इखलाक नफासत है
शिर्क नहीं है, कुफ्र नहीं है सिर्फ इताअत है
बडे बुजुर्गों की इज्‍जत, मां वालिद का सम्‍मान
बच्‍चों को बस बनके दिखला तेरा है कुरआन
इसीलिए यह धर्म हया के दिल को भाता है
वह है सच्‍चा मजहब जो इस्‍लाम कहाता

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