चन्द अहम सवाल
एक शख्स मुश्किल में है और वह अल्लाह के सिवा किसी ओर को पुकारना चाहता है जिसके बारे में यह मशहूर कर दिया गया है कि यह मुश्किल दूर कर सकते हैं׀ यानी कि जैसे लोग कहते हैं या अली कर मदद, या गौस कर मदद, बगैरह बगैरह ׀ अब जो शख्स मुश्किल में है वह हिन्दोस्तान में गौस पाक को पुकार रहा है और कुछ लोग पाकिस्तान में पुकार रहे हैं बांग्लादेश में पुकार रहे हैं, हजारों मील का फासला है׀ तो फिर सवाल यह पैदा होता है ׀
1. तो या गौस पाक या कोई भी नबी, वली और कोई भी बुजुर्ग उसकी आवाज को सुन सकते हैं, चलो हम यह भी मान लेते हैं, कि वे सुनते हैं, तो फिर सवाल यह पैदा होता है׀
2. क्या वे दुनिया की हर भाषा जानते हैं ? क्योंकि इस दुनिया में हर तरह के बोलने वाले हैं, अमेरिकन अमेरिकी भाषा में पुकारेगा, पंजाबी पंजाबी भाषा में पुकारेगा, गुजराती-गुजराती भाषा में पुकारेगा, बगैरह बगैरह ׀ तो क्या वह दुनिया की हर भाषा जानते हैं ? चलो हम यह भी मान लेते हैं कि वह दुनिया की हर भाषा जानते हैं फिर एक मिनट में हजारों और सैंकडों लोग उनको पुकारते हैं, क्योंकि एक वक्त में कई लोगों को मुश्किल पेश आ सकती है׀ तो फिर यह सवाल पैदा होता है ׀
3. क्या उस हस्ती को जो जिन्दा है या मुर्दा उसे कभी नींद भी आती है या नहीं, या वह हमेशा जागते ही रहते हैं׀ अगर उन्हें नींद आती है तो फिर हमारे पास उनका टाइम टेबिल होना चाहिए कि वे कब सोते हैं कब जागते हैं׀ हमारे अल्लाह की शान तो यह है कि उसे न नींद आती है नींद तो नींद उसे ऊंघ तक नहीं आती׀ यह तो हमारे अल्लाह की शान है, लेकिन अल्लाह के सिवा जिसको यह पुकारना चाह रहा है, चाहे वह हस्ती जिन्दा हो या मुर्दा उन्हें कभी नींद नहीं आती अगर कभी नींद आती है तो हमारे पास एक लिस्ट होनी चाहिए कि वे कब सोते हैं और जाग रहे होते हैं, ताकि हम अपनी मुश्किल को उस वक्त पेश करें जब वे जाग रहे हों, उनको नींद में हम परेशान न करें, या फिर वह बतलाया जाय कि उन्हें कभी नींद ही नहीं आती, और जिसे कभी नींद ही नहीं आती वह कौन है, अल्लाह है׀ तो फिर यह सवाल पैदा होता है ׀
4. एक शख्स गूंगा है, या कोई इंसान ऐसी मुश्किल में फंसा हुआ है, कि उसका गला बन्द है, आवाज नहीं निकल रही है, अगर वह दिल में अपनी मुश्किल अल्लाह के सिवा किसी हस्ती के लिए पेश करता है जो जिन्दा है या मुर्दा׀ तो क्या वह हस्ती उसके दिल की फरियाद को सुन सकती है? अल्लाह की शान तो यह है कि जो तुम छुपाते हो या जो तुम जाहिर करते हो उसे भी अल्लाह जानता है׀ एक गूंगा पुकारना चाहे या अली कर मदद या गौस कर मदद तो उसकी आवाज नहीं निकलती दिल में कहेगा, तो क्या गौस पाक को इसकी भी खबर हो जाती है या जिन बुजुर्गों को लोग पुकारते हैं अगर यह अकीदा रखते हैं, तो बताओ वे मुसलमान हो सकते हैं׀ तो फिर यह सवाल पैदा होता है׀
5. अगर अल्लाह तमाम मुश्किलों को हल कर सकता है और करता है तो फिर ये बताओ गैर के पास जाने की क्या जरूरत है׀ और अगर अल्लाह के सिवा कोई मुश्किलों को हल कर सकता है तो फिर बताओ अल्लाह की क्या जरूरत है׀ न-अऊजो बिल्लाह (अल्लाह की पनाह) यह यही साबित करना चाहते हैं कि कुछ मदद अल्लाह कर देता है और कुछ मदद यह कर देते हैं׀ तो फिर ये सवाल पैदा होता है׀
6. अगर अल्लाह के सिवा जिसको यह पुकारते हैं चाहे नबी हो वली हो या पीर हो कोई भी हो, अगर जिसको ये मुश्किल कुशा(संकट मोचक) समझते हैं, हाजत रवा समझते हैं अगर तमाम मुश्किलों के हल करने पर कादिर हैं, या अगर तमाम मुश्किलों के हल करने पर कादिर नहीं है तो हो सकता है, कुछ मुश्किलों के हल करने का बेडा अल्लाह ने उठाया हो और कुछ दूसरों ने उठाया हो, तब भी हमारे सामने ऐसी सूरत में एक लिस्ट होनी चाहिए कि कौन सी मुश्किलें अल्लाह से हल करवाई जायें और कौन सी गैर अल्लाह से हल करवाये जायें׀ तो फिर ये सवाल पैदा होता है ׀
7. क्या अल्लाह के सिवा जो हस्ती मुश्किल दूर कर सकती है, क्या वो मुश्किल में डाल भी सकती है, या उसकी डयूटी सिर्फ मुश्किलों को दूर करने पर है׀ हमने तो आज कल किसी को मुश्किल में डालते हुए नहीं सुना ׀ सबकों मुश्किल कुशा (संकट मोचक) ही कहते हुए सुना׀ अगर वह मुश्किल कुशा है, तो क्या वह मुश्किल में डालते भी हैं, अगर वो हस्ती मुश्किल हल कर सकती है तो मुश्किल में डालने वाला कौन है׀ न-अऊजो बिल्लाह इसका मतलब यह हुआ कि अल्लाह मुश्किल में डालता है, यह लोग मुश्किल से निकालते हैं, तो न-अऊजो बिल्लाह यह तो बडे हमदर्द हुए जालिम तो सबसे बडा अल्लाह हुआ׀ तो फिर यह सवाल पैदा होता है׀
8. जाहिर है कि नतीजा यही निकलेगा कि अल्लाह तआला मुश्किल में डालने वाला है, और अल्लाह के सिवा जो हस्ती है जिनको ये लोग पुकारते हैं, वो मुश्किल हल करने वाले हैं׀ (अब यहां मानलो कि), एक हस्ती का काम मुश्किल डालने पर हो और दूसरी हस्ती का काम मुश्किल को दूर करने पर हो׀ तो दोनों हस्तियों में कौन जीतेगा, डालने वाला जीतेगा या हल करने वाला जीतेगा, यह तो लडाना हुआ, अल्लाह के मुकाबले में गैरों को׀ तो फिर यह सवाला पैदा होता है׀
9. अगर किसी की नमाजे जनाजा हमें पढनी हो तो उसकी मगफिरत या बख्शिश के लिए हम अल्लाह को पुकारेंगे या गैर अल्लह को पुकारेंगे׀ जब तुम मरने में अल्लाह को पुकारते हो तो जिन्दगी में अल्लाह को क्यों नहीं पुकारते׀
ऐ अल्लाह हम सबको नेक अमल करने की तौफीक अता फरमा׀ कुरआन और सुन्नत पर अमल करने की तौफीक अता फरमा׀ हम सबकों नबी से सच्ची और पक्की मुहब्बत करने की तौफीक अता फरमा׀ शिर्क जैसे बदतरीन जुर्म से बचने की और शिर्क जैसे बडे गुनाह से तौबा करने की तौफीक अता फरमा׀ दुनिया के मुसलमानों को तौहीद के झन्डे को लहराने की तौफीक अता फरमा׀ आमीन या रब्बल आलमीन
कुरआन करीम के नवें पारे में सूरे आराफ की आयत नं0 196 में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है׀ तर्जुमा- (ऐ नबी आप कह दीजिए) बेशक मेरा मददगार तो सिर्फ अल्लाह है׀ (यानी मेरा दोस्त हिमायती और सर परस्त और मेरे सब काम बनाने वाला एक अल्लाह मुझको काफी है׀)
कुरआन करीम के छत्तीसवें पारे में सूरे काफ की आयत नं0 16 में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है׀ तर्जुमा- इन्सान को पैदा करने वाले सिर्फ हम हैं और उसके जी में जो ख्यालात आते हैं वो सब हमको मालूम हैं और हम तो इन्सान की गर्दन की रग से ज्यादा करीब हैं׀
कुरआन करीम के बीसवें पारे में सूरे नम्ल की आयत नं0 62 में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है׀ तर्जुमा- अल्लाह के सिवा वह कौन है? जो बेकस लाचार की पुकार को जब भी वह दुआ करे कबूल फरमा लेता है और मुसीबत से छुटकारे के रास्ते खोल देता है׀
हर मुसलमान सब नमाजों में और हर एक रकात में बार बार अल्लाह से वादा करता है कि (हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद चाहते हैं. सूरे फातिहा आयत नं0 4)
भाई आप बहुत बेहतरीन लिखते है माशाल्लाह !
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